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मप्र : एक राज छुपाने के लिए बच्चे को जन्म देते ही 18 साल की लड़की मुंह पर स्कार्फ बांधकर भागने पर हुई मजबूर, डॉ से बोली- एक घंटे पहले पैदा हुए मेरे बच्चे को फेक देना… एक्सपर्ट ने बताया ऐसे में क्या कहता है कानून

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मप्र के धामनोद में 18 साल की एक युवती ने सरकारी अस्पताल में बालक को जन्म दिया और होश में आते ही बच्चे को छोड़कर चली गई। होश में आने पर लड़की ने कहा कि,एक घंटे पहले पैदा हुए मेरे बच्चे को किसी को दे दो, नहीं तो फेंक दो। मैं इसे अपने साथ नहीं ले जाऊंगी। वो नवजात बच्चे को अस्पताल में छोड़ जींस-टॉप पहन और चेहरे पर स्कार्फ बांधकर सबके सामने से निकल गई। नवजात अभी धार के सरकारी अस्पताल में ही एडमिट है। हमने इस मामले में एक्सपर्ट्स से बात कर जाना कि क्या ऐसे कोई भी मां नवजात को छोड़कर जा सकती है? ऐसे बच्चों का क्या होता है? कानून में इसे लेकर क्या प्रावधान है?

क्या होता है ऐसे बच्चों का…

चाइल्ड केयर लाइन इंदौर के डायरेक्टर वसीम इकबाल ने बताया कि जिन बच्चों को मां-बाप छोड़कर चले जाते हैं, उन्हें जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत शुरुआत में गवर्नमेंट हॉस्पिटल के इंसेंटिव केयर में ही रखा जाता है।

– बाद में चाइल्ड वेलफेयर कमेटी बच्चों को एडॉप्शन सेंटर में ले जाती है।

– एडॉप्शन सेंटर में ले जाने से पहले ऐसे बच्चों को लीगली फ्री करवाया जाता है।

– इसके तहत चाइल्ड वेलफेयर कमेटी और डिस्ट्रिक्ट कोर्ट मिलकर प्रॉसेस करते हैं।

– पहले बच्चे के मां-बाप को आइडेंटिफाई किया जाता है। यदि वे मिल जाते हैं और बच्चे को अपने साथ रखने को तैयार हो जाते हैं तो बच्चा उन्हें सौंप दिया जाता है।

– वहीं यदि मां-बाप को साथ नहीं रखना चाहते तो उनकी सहमति से बच्चे को एडॉप्शन सेंटर में पहुंचाया जाता है।

– बाद में एडॉप्शन सेंटर के जरिए बच्चे को जो लोग उन्हें गोद लेना चाहते हैं, उन्हें सौंप दिया जाता है।

– अब यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन हो चुकी है।

क्या कहता है कानून

मप्र हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट संजय मेहरा ने बताया कि, ऐसे मामले में सबसे पहले युवक-युवती की उम्र देखी जाती है। यदि युवती 18 साल से कम उम्र की है तो नाबालिग होगी। नाबालिग लड़की के साथ संबंध बनाना अपराध की श्रेणी में है। ऐसा करने पर आईपीसी की धारा 376 के तहत प्रकरण दर्ज होता है और फांसी से लेकर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है।

– कहीं भी ऐसा बच्चा मिले या हॉस्पिटल में जन्म ले तो सबसे पहले इसकी सूचना पुलिस को देना जरूरी है।

– भरण-पोषण अधिनियम के तहत हर मां-बाप की यह जिम्मेदारी है कि वह वयस्क होने तक अपने बच्चे का अच्छा पालन-पोषण और परवरिश करे।

– यदि मां-बाप आर्थिक स्थिति खराब होने के चलते ऐसा नहीं कर पाते तो वह बच्चे को एनजीओ या दूसरे संस्थान में कानूनी प्रक्रिया के तहत सौंप सकते हैं।

– यदि कोई मां भी नवजात को छोड़कर भाग जाती है तो उसके खिलाफ जुवेनाइल एक्ट के तहत कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।

युवती नाबालिग हुई तो…

– धामनोद केस में युवती ने अपनी उम्र 18 साल बताई है, इस हिसाब से उसने संबंध सालभर पहले बनाए होंगे। तब वह नाबालिग होगी। ऐसे में पुलिस तहकीकात में यह पता चलेगा कि लड़की ने किसके साथ संबंध बनाए। इस मामले में संबंध बनाने वाला लड़का कानूनी शिकंजे में फंस सकता है। साथ ही लड़की से भी पुलिस पूछताछ कर सकती है। लड़की को नवजात को छोड़कर भागने के चलते जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

कहां करें शिकायत

– आपको कभी ऐसा कोई बच्चा मिले तो सबसे पहले हेल्पलाइन लाइन नंबर 1098 पर कॉल करें। इसके बाद 100 नंबर पर कॉल कर पुलिस को सूचना दें।

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