Home लाइफस्टाइल बच्‍चों को सिखाएं शिष्टाचार संबंधी ये अच्‍छी बातें

बच्‍चों को सिखाएं शिष्टाचार संबंधी ये अच्‍छी बातें

157
0

यदि आपका बच्चा छोटा है तो इसका यह मतलब नहीं है कि अभी अच्छी बातें या शिष्टाचार सिखाने की उसकी उम्र नहीं है। छोटी आयु से ही बच्चे नई-नई चीजें बहुत जल्दी सीख जाते हैं। बच्चों को हमेशा याद रहता है कि उन्हें क्या सिखाया गया है और वे बड़ी आयु की तुलना में बचपन में चीजों को बहुत तेजी से सीखते हैं। तो आइये जानतें हैं –

बच्चों को काइंड बनना और लोगों की मदद करना सिखाएं
आप अपने बच्चे में दूसरों के प्रति दया का भाव रखने और किसी की मदद करने की आदत भी डाल सकती हैं। इससे आपके बच्चे को खुद में अच्छा महसूस होगा और वह लोकप्रिय होगा। आप बच्चे को कुछ चीजें सीखा सकते हैं, जैसे यदि किसी के हाथ में बहुत सारा सामान है तो उसके लिए दरवाजे को खोलना और पकड़े रखना या किसी काम में अपने माता-पिता व शिक्षक की मदद करना।

बच्चों के साथ ईमानदार रहें
बच्चों को छोटी उम्र से ही ईमानदार रहना सिखाएं और उन्हें बताएं कि उन्हें झूट नहीं बोलना चाहिए। यह महत्वपूर्ण वैल्यूज हैं जो बच्चों के लिए जरूरी हैं। सुनिश्चित करें कि वह हमेशा उन बातों पर दृढ़ रहे जो वह कहता है। यदि बच्चा खोकले वाडे करता है तो उसके साथ बैठें और उसे सच बोलने का महत्व बताएं। दृढ़ रहें और उन्हें बताएं कि ईमानदारी ही एक सबसे अच्छी नीति है। बच्चों का नैतिक विकास शुरू से होना बहुत जरूरी है।

बच्चों के सामने गलत भाषा का उपयोग न करें
गलत भाषा बहुत ज्यादा अपमानजनक और असभ्य होती है। आप अपने बच्चे को सिखाएं कि उसे किसी से भी गलत भाषा में बात नहीं करनी चाहिए। फिर चाहे उसने यह सब टीवी पर किसी शो में सुना हो या कहीं और। इस आदत को सीखना बहुत जरूरी है। आप चाहें तो अपने बच्चे के साथ आराम से बैठें और उसे समझाएं कि ऐसी भाषा का उपयोग करना क्यों गलत होता है।

कुछ भी लेने से पहले बच्चों को पूछना सिखाएं
बच्चों को सिखाएं कि वे हमेशा किसी की कोई भी चीज लेने से पहले उनसे पूछ लें क्योंकि वह किसी और की चीज है। चाहे वह चीज उसके दोस्त, रिश्तेदार या माता-पिता का ही क्यों न हो, लेने से पहले पूछना जरूरी है। अपने बच्चे को यह भी सिखाएं कि उसने जो चीज ली है, उसे ‘थैंक यू’ कहते हुए वापस करे।

बच्चों को माफी मांगना सिखाएं या सॉरी बोलना सिखाएं
प्लीज और थैंक यू के साथ बच्चे को सिखाएं कि यदि वह कोई गलती करता है तो उसे सॉरी कहना यानी माफी मांगना भी जरूरी है। बच्चे में गलती करने पर माफी मांगने की आदत होनी चाहिए। बच्चे को सिखाएं कि उसे कब व कहाँ माफी मांगनी चाहिए और हर बार ऐसे ही सॉरी नहीं बोलना चाहिए। माफी मांगना एक स्किल है जिसे अपने बिहेवियर में ढालना आना चाहिए।

खांसते या छींकते समय बच्चों को मुंह ढकना सिखाएं
बच्चों को सिखाएं कि उन्हें जब भी खांसी या छींक आती है तो उन्हें अपना मुंह ढकना चाहिए। साथ ही उन्हें बताएं कि कई लोगों के सामने नाक में उंगली डालना बैड बिहेवियर होता है। यह सिर्फ अच्छी आदतें ही नहीं हैं बल्कि यह स्वच्छता का भी एक भाग है।

बड़ों की रेस्पेक्ट करना सिखाएं
बहुत पहले से यह ट्रेडिशन चली आ रही है कि ज्ञान प्राप्त करने के लिए बच्चों को अपने से बड़ों की रेस्पेक्ट करना चाहिए। अपने बच्चे को सिखाएं कि वह अपने माता-पिता, दादा-दादी, टीचर्स और अन्य बड़ों की रेस्पेक्ट करनी चाहिए। बड़ों का आदर करने का एक यह भी तरीका है कि बच्चों से पहले घर के बड़ों को खाना परोसें या पब्लिक ट्रांसपोर्ट में बड़ों या बुजुर्गों को बैठने के लिए अपनी सीट दें और यदि बच्चा आपको ऐसा करते हुए देखता है तो वह भी इस आचरण को अपना लेगा। उन्हें इसके महत्व का ज्ञान भी होगा।

बच्चों को विकलांग लोगों के लिए दयालु बनना सिखाएं
बच्चे हर चीज के लिए बहुत ज्यादा उत्सुक होते हैं इसलिए यदि वे किसी विकलांग व्यक्ति को देखते हैं तो उसकी तरफ इशारा करते हैं, जोर से सवाल पूछ सकते हैं या डर भी सकते हैं। बच्चों को यह सिखाना चाहिए कि विकलांग व्यक्ति भी अन्य लोगों की तरह ही होते हैं और उनके साथ भी वैसा ही व्यवहार करना चाहिए जैसा अन्य लोगों के साथ किया जाता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here