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वचन और भावना का बंधन है, रक्षाबंधन

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सबको राखी का त्योहार मुबारक

बहनों को भाइयों का साथ मुबारक,
भाइयों को बहना का प्यार मुबारक।
रहे ये सुख हमेशा आपकी जिंदगी में,
सबको राखी का ये त्योहार मुबारक।।

आज देशभर में रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जा रहा है। हर साल श्रवण मास की पूर्णिमा को यह त्योहार मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई में रक्षासूत्र बांधकर उनके लिए दुआएं मांगती हैं। बदले में भाई उनकी रक्षा का वचन देते हैं, तोहफे देते हैं। प्रेम और विश्वास का यही बंधन भाई और बहन के रिश्ते के स्नेह की डोर अर्थात राखी होती है।

इस बार 22 अगस्त 2021 को मनाए जा रहे रक्षाबंधन पर्व पर ग्रह एवं नक्षत्रों का ऐसा शुभ संयोग बन रहा है जो 50 वर्षों बाद हो रहा है। ज्योतिषाचार्य पंडित मधुकर मिश्र के अनुसार इस दिन घनिष्ठा नक्षत्र के साथ ही शोभन योग है। शोभन योग से शुभता में वृद्धि होगी। इस दिन पूर्णिमा तिथि का मान शाम 5:31 बजे तक एवं धनिष्ठा नक्षत्र रात्रि 7:38 बजे तक है। चंद्रमा कुंभ राशि में होंगे। राखी बंधवाते समय भाई का मुख पूर्व दिशा में और बहन का पश्चिम दिशा में हो तो इसे आदर्श माना जाता है। बहनों को भाई को रोली, अक्षत का टीकालगाना चाहिए, घी के दीपक से आरती उतारनी चाहिए और उसके बाद मिठाई खिलाकर भाई के दाहिने कलाई पर राखी बांधना चाहिए। राखी बांधते समय ‘ॐ येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:। तेन त्वामभि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल’ मंत्र पढ़ना चाहिए ताकि इसका शुभ परिणाम मिल सके।

पौराणिक कथाओं के मुताबिक भगवान विष्णु के घर न लौटने से परेशान लक्ष्मी जी को नारद जी ने एक उपाय बताया। उसी के अनुसार उन्होंने राजा बलि को अपना भाई मानकर राखी बांधी थी और इसके बदले में बलि से भगवान विष्णु को मांगा था। उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि थी। तभी से रक्षाबंधन मनाया जाने लगा। एक मान्यता यह भी है कि शिशुपाल का वध करते समय भगवान कृष्ण की तर्जनी उंगली कट गयी थी। तब द्रोपदी ने अपनी साड़ी फाड़कर उनकी उंगली पर पट्टी बांधा था। उस दिन श्रावण पूर्णिमा का दिन था। तभी से रक्षाबंधन मनाया जाता है। बहरहाल, रक्षाबंधन को लेकर देश के अलग-अलग भागों में अलग अलग मान्यताएं हैं। रक्षाबंधन को राखी, कजली, कजलियां, कजरी महोत्वस आदि नामों से भी जाना जाता है।

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