Home गुजरात नकली चोर बनकर पुलिस ने असली चोरों के हौसले किये पस्त

नकली चोर बनकर पुलिस ने असली चोरों के हौसले किये पस्त

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पहले निकाले मोबाइल, फिर समझाया और बाद में लौटाया

सूरत। मोबाईल चोरी हो जाना, ऐसे तो एक सामान्य घटना है, लेकिन आज के समय में इंसान शायद ही मोबाइल के बिना रह सकता है। सबेरे उठने के बाद से लेकर रात के सोने तक मोबाइल लोगों की सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है। इसके बावजूद इसकी चोरी करना चोरों के लिए सबसे सरल टार्गेट हैं। शहर में प्रतिदिन 20 मोबाइल की चोरी हो जाती है। इनमें से कई मामले सुलझाने में पुलिस सफल होती है तो कई सिर्फ कागजो में रह जाते हैं। पुलिस का मानना है कि लोगों की थोड़़ी सी जागृती इसे रोक सकती है। इसलिए खटोदरा पुलिस ने लोगों में जागृती लाने का बड़ा ही अनोखा प्रयोग शुरू किया है।

पुलिस के जवान खुद ही कई प्वाइन्ट पर खड़े हो जाते हैं और जिन लोगों के आगे के खिसे में मोबाइल रहता है उसे निकाल लेते हैं। इसके बाद जिसके खिसे से मोबाइल निकाला है उसे थाने पर ले जाकर समझाते हैं और सतर्क रहने की सलाह देते हैं।

मोबाइल चोरी करना सबसे सरल टार्गेट

पुलिस के अनुसार मोबाइल चोरी करना सबसे सरल टार्गेट हैं। चोर इसे बहुत आसान मानते हैं। इसके लिए उन्हें ज्यादा मेहनत भी नही करनी पडती। मोबाइल चोरी करने वाले ज्यादातर बाइक चलाते समय बात करने वाले या जिनके आगे के खिसे में मोबाइल रहता है उन्हें टार्गेट करते हैं। मोबाइल चोरी करने के बाद चोर तुरंत उसमें से सिमकार्ड निकाल देते हैं और मोबाइल स्वीचऑफ कर देते हैं। इसके बाद मोबाइल औने-पौने दाम में बेच देते हैं। आइफोन से लेकर की-पेड वाले मोबाइल तक 30 प्रतिशत दाम में बेच देते हैं। इसके लिए शहर के कुछ मार्केट तय हैं जिनमें कि इस तरह के मोबाइल की खरीद बिक्री होती है।

शहर में रोजाना 20 मोबाइल चोरी

सूरत शहर में मोबाइल चोरी और चेन स्नेचिंग के दूषण पुलिस के लिए सिरदर्द बनता जा रहा है। पुलिस ने इसे रोकने के लिए पिछले दिनों ड्राइव भी शुरू की थी। इसमें कई लोगों को पकड़ा भी गया था। शहर में रोजाना 20 मोबाइल की स्नेचिंग होती है। कई मामलों में पुलिस तक शिकायत पहुंचती है और कई मामलों में लोग पुलिस तक जाते ही नहीं। त्यौहारों के दिनों में चोरी की वारदात बढ जाती है।

शहर पुलिस ने किया सर्वे

मोबाइल चोरी की घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस ने प्लान बनाया। इसके लिए खटोदरा पुलिस ने सर्वे किया कि किस तरह से मोबाइल स्नेचर घटना को अंजाम देते हैं, वह किन लोगों को टार्गेट बनाते हैं और किस स्थान पर यह घटनाएं ज्यादा होती है। इस सर्वे में यह परिणाम सामने आया कि जो लोग शर्टे के आगे के जेब में मोबाइल रखते हैं उनके साथ यह घटनाए ज्यादा होती है और शाम के समय यह वारादात ज्यादा होती है।

पुलिस ने खुद ही मोबाइल निकालने का प्लान बनाया

सर्वे के बाद पुलिल ने लोगों तक जागृती फैलाने के लिए आयोजन बनाया, जिसमें कि पुलिस ने छ-छ लोगो की टीम बनाई। यह टीम जिन प्वाइन्ट पर ज्यादा मोबाइल चोरी हुए थे। ऐसे चार प्वाइन्ट सोसियो सर्कल, भटार, नवजीवन सर्कल और गांधीकुटर सर्कल पर खड़े हो गए। यह पुलिस कर्मी सामान्य लोगों के ड्रेस में थे। इसके बाद जो लोग यहां से बाइक पर गुजरते हुए शर्ट के आगे के खिसे में मोबाइल रखे थे उनका मोबाइल निकाल लेते। इसके बाद उन्हें पुलिस स्टेशन बुलाकर समझाते है कि शर्ट के आगे के खिसे में मोबाइल रखने से चोरी सरलता से हो सकती है। दो महीने में पुलिस ने 60 से अधिक लोगों को इस तरह से समझाया। 25 लोग तो ऐसे थे जिन्हे कि मोबाइल चोरी हो जाने की खबर ही नहीं थी। पुलिस ने उन्हें रोक कर या मोबाइल में रखे कोन्टेक नंबर के आधार पर बुलाकर समझाया और मोबाइल लौटाया।

हेल्मेट पहनने वालों को नहीं चलता पता
पुलिस ने अपने इस अभियान के तहत एक बात यह दर्ज की कि जिन लोगों ने हेल्मेट पहन रखा था और आगे कि खिसे में मोबाइल रखा था, उन्हें पता ही नहीं चला कि उनके खिसे से मोबाइल पार हो गया है।

खटोदरा पीएसआई आर.एस पटेल ने बताया कि मोबाइल स्नेचरो को रोकने के लिए लोगों में जागृती भी जरुरी है। यदि लोग थोडी सी सावधानी बरते तो चोरी नहीं हो सकती। इसलिए हमने पीआई टीवी पटेल के मार्गदर्शन में लोगों को जागृत करने का प्रयास किया। इसमें कुछ प्वाइन्ट पर पुलिस के जवान ही लोगों के खिसे से मोबाइल निकाल कर उन्हें समझाने का काम किया। इसके चलते त्यौहारों के दिनो में अच्छे परिणाम मिले।

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