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कृषि कानून वापस लेने पर विपक्ष का सरकार पर हमला, कहा-सत्य की आखिर जीत हुई

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अहमदाबाद। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज देव दिवाली और गुरु नानक जयंति के पवित्र अवसर पर तीन कृषि कानून वापस लेने की घोषणा को कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने इसे आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए लिया गया फैसला करार दिया। साथ ही कहा कि आखिरकार अहंकार को झूकना पड़ना और सत्य की जीत हुई है। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार की सुबह 9 बजे देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी सरकार तीनों कृषि कानून वापस ले रही है। यह वही कानून हैं जिन्हें वापस लेने की मांग करते हुए देशभर के किसान पिछले एक साल से आंदोलन कर रहे हैं और अपनी बात मनवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच गए।

पीएम मोदी ने किसानों से अपील की कि अब वे अपने घरों को लौंट जाएं, अपने खेतों में जाएं। पीएम मोदी के इस ऐलान के बाद विपक्ष के भाजपा सरकार पर हमले शुरू हो गए। गुजरात प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष हार्दिक पटेल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि ‘आज किसान और उनके आंदोलन को विजय प्राप्त हुई है। आंदोलन में और भाजपा की तानाशाही से शहीद हुए किसानों को यह विजय श्रद्धाजंलि के रूप में अर्पित करता हूं।

भाजपा के नेता अभी तक तीन कृषि कानून लागू होने के फायदे गिनाते थे लेकिन आज से तीन कृषि कानून वापस लेने के फायदे गिनाएंगे। ’ गुजरात प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता मनीष दोशी ने कहा कि तीनों कृषि कानून किसान, खेती और गांव विरोधी थे। इन कानूनों को रद्द करने के लिए किसान पिछले एक वर्ष से भी अधिक समय से आंदोलनरत थे। इस दौरान 600 जितने किसान शहीद भी हो गए। लेकिन भाजपा को शहादत प्यारी है। अब उसने कानून रद्द किए हैं| जबकि राहुल गांधी इन कानूनों को शुरु से विरोध कर रहे थे और किसान व गांव के साथ खड़े थे। गुजरात प्रदेश कांग्रेस भी विधानसभा से लेकर सड़क तक लगातार किसानों के साथ खड़ी थी। आज यह जीत किसानों की और शहीद किसानों की है।

गुजरात प्रदेश आम आदमी पार्टी (आप) ने भी भाजपा सरकार पर कड़े प्रहार किए। गुजरात आप के नेता इशुदान गढवी ने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट किया है। जिसमें इशुदान गढवी ने उन सभी किसानों का अभिनंदन करते हुए कहा कि जिन्होंने इस अहंकारी सरकार के खिलाफ अपना आंदोलन लगातार जारी रखा और अपने हित के लिए संघर्ष किया। गढवी ने मेरा केन्द्र सरकार से एक सवाल है। सवा वर्ष से भी अधिक समय से चल रहे आंदोलन के दौरान किसानों को कभी आतंकवादी, खालिस्तानी कभी आंदोलनजीवि कहा। इतना ही नहीं 700 से ज्यादा किसानों की आंदोलन के दौरान मौत हो गई। उन निर्दोष किसानों की मौत के लिए कौन जिम्मेदार है? उनके परिवारों का भरणपोषण कौन करेगा?

उपचुनाव में हार के बाद सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कीमतें घटाईं और अब कृषि कानून वापस लिए| सोचिए जरा कि यह सरकार केवल चुनावजीवि है। सरकार को अहसास हुआ कि अब अपनी नहीं चलेगी इसलिए चुनाव निकट आते ही कानून वापस लेने की घोषणा की| यदि देश की जनता एक हो जाए तो इस अहंकारी सरकार को झुकना पड़ेगा। गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला ने कृषि कानून वापस लेने पर ट्वीट किया है। वाघेला ने अपने ट्वीट में लिखा ‘संघर्ष और सत्य की हमेशा जीत होती है। ’

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