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बोधगया यौन शोषण मामलाः अभिभावकों ने बताई भिक्षुकों की काली करतूत, इन अंगों पर करते थे वार

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नई दिल्ली। बिहार के गया ज़िले के विष्णुपद मंदिर के पास बने असम भवन में इन दिनों सन्नाटा पसरा हुआ है। यहां आकर ये अंदाजा लगाना मुश्किल है कि यहां 15 वर्ष से छोटी उम्र के लड़के रह रहे हैं, क्योंकि सब शांत हैं। न कोई मस्ती, ना कोई खेल, ना कोई शरारत…बस एक अनकहा डर और लंबी सी चुप्पी। सिर्फ बच्चे नहीं बल्कि उनके अभिभावकों का भी यही हाल है। बच्चों के चेहरे की हंसी छिन जाने का गम इनके चेहरे पर भी साफतौर पर देखा जा सकता है।

 

इस तरह के करवाए जाते थे काम

ये बच्चे बोधगया के मस्तीपुर गांव स्थित प्रजना ज्योति बुद्धिस्ट नोविस स्कूल एंड मेडिटेशन सेंटर में पढ़ते थे। बीते 29 अगस्त को इस मेडिटेशन सेंटर में पढ़ने वाले बच्चों के साथ कथित तौर पर यौन शोषण का मामला सामने आया था। बच्चों के साथ होने वाले इस यौन शोषण का जब इन अभिभावकों को पता चला तो उनके पैरों के नीचे से मानो जमीन ही खिसक गई। एक बच्चे के पिता ने बताया कि लड़कों को बौद्ध भिक्षु कमरे में बुलवाकर अश्लील हरकते (हस्तमैथुन) करने के लिए मजबूर करते थे।

शहर के बाहर ले जाकर भी होता था ये काम…

सेंटर के अलावा बाहर ले जाकर भी लड़कों के साथ अश्लील हरकतें की जाती थी। यहां तक की जब बौद्ध भिक्षु कोलकाता जाते तब भी लड़कों का यौन शोषण किया। वहीं एक अन्य महिला ने बताया कि उसके नौ साल के बेटे का शरीर घाव के दाग से भरा पड़ा है। माथे पर चोट का लंबा निशान है जो रह रह कर उसके शोषण की याद दिलाता है।

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निजी अंगों पर वार से दी जाती थी यातनाएं

एक अन्य महिला के मुताबिक जब हम लोग सेंटर पर पहुंचे तो बच्चे हमें देखकर रोने लगे। उन्होंने बताया कि उन्हें कपड़े उतारकर पीटा जाता था यही नहीं बौद्ध भिक्षु उनके नीजि अंगों को खींच देते थे। इस काम को कई बार भिक्षुकों के कहने पर बड़े बच्चे भी अंजाम देते थे।

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