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केंद्र की चार धाम डबल लेन सड़क परियोजना को सुप्रीम कोर्ट की इजाजत

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नई दिल्ली। केंद्र की मोदी सरकार की चार धाम सड़क परियोजना को अंतत: सुप्रीम कोर्ट की अनुमति मिल गई है। पहले शीर्ष कोर्ट ने सुरक्षा चिंताओं के मद्देनजर चारधाम सड़क परियोजना के लिए डबल लेन की अनुमति नहीं दी थी। इसके साथ ही पूर्व जज जस्टिस एके सीकरी की अध्यक्षता में समिति का गठन किया गया है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला मोदी सरकार के लिए राहत भरा है। सुप्रीम कोर्ट ने ऑल वेदर राजमार्ग परियोजना में सड़क की चौड़ाई बढ़ाने की इजाजत दे दी जिसके बाद डबल लेन हाइवे बनाने का रास्ता साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा अदालत न्यायिक समीक्षा में सेना के सुरक्षा संसाधनों को तय नहीं कर सकती। कोर्ट ने कहा कि हाइवे के लिए सड़क की चौड़ाई बढ़ाने में रक्षा मंत्रालय की कोई दुर्भावना नहीं है।

रक्षा मंत्रालय का कहना था कि इस सड़क के निर्माण से भारत की फौज को सीमा तक टैंक और हथियारों के साथ पहुंचने में काफी आसानी होगी और पर्वतीय क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बढ़ेगी। एक एनजीओ ने सड़क को 10 मीटर तक चौड़ा डबल लेन बनाने को चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने देश की रक्षा ज़रूरतों के आधार पर सरकार की अधिसूचना को सही ठहराया। लेकिन पर्यावरण से जुड़ी चिंताओं पर नज़र रखने के लिए पूर्व जस्टिस एके सीकरी की अध्यक्षता में कमिटी का गठन किया। कमिटी सीधे सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट देगी। चारधाम परियोजना का उद्देश्य सभी मौसम में पहाड़ी राज्य के चार पवित्र स्थलों यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ को जोड़ना है। इस परियोजना के पूरे हो जाने के बाद हर मौसम में चार धाम की यात्रा की जा सकेगी। इस परियोजना के तहत 900 किलोमीटर लम्बी सड़क परियोजना का निर्माण हो रहा है जिसमें से अभी तक 400 किमी सड़क का चौड़ीकरण किया जा चुका है। एक अनुमान के मुताबिक, अभी तक 25 हजार पेड़ों की कटाई हो चुकी है, जिससे पर्यावरणविद नाराज हैं।

गैर सरकारी संगठन ‘सिटीजन फॉर ग्रीन दून’ ने एनजीटी के 26 सितंबर 2018 के आदेश के बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। एनजीटी ने व्यापक जनहित को देखते हुए इस परियोजना को मंजूरी दी थी। एनजीओ का दावा था कि इस परियोजना से इस क्षेत्र की पारिस्थितिकी को होने वाले नुकसान की भरपाई नहीं हो सकेगी।

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