Home देश हम उत्‍तराखंड को विकास का दशक बनाएंगेः मोदी

हम उत्‍तराखंड को विकास का दशक बनाएंगेः मोदी

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हल्द्वानी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हल्द्वानी में 17,500 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली छह परियोजनाओं का उद्घाटन और लखवाड़ बहुउद्देश्यीय परियोजना सहित 17 परियोजनाओं का शिलान्यास किया। प्रधानमंत्री ने जिन परियोजनाओं का उद्घाटन किया, उनमें सड़क चैड़ीकरण परियोजनाएं, पिथौरागढ़ में एक पनबिजली परियोजना और नैनीताल में सीवरेज नेटवर्क शामिल हैं। इन परियोजनाओं की कुल लागत 3,400 करोड़ रुपये है। इस दौरान रैली को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि पहले पहाड़ों को विकास से वंचित रखा गया था। हम उत्‍तराखंड को विकास का दशक बनाएंगे। उससे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के देवभूमि उत्तराखण्ड आने पर आर्मी हैलीपेड, हल्द्वानी पर राज्यपाल ले.ज. (से.नि) गुरमीत सिंह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उनका स्वागत किया।

पीएम मोदी ने उत्‍तराखंड की पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा, वैसे आज जब जनता जनार्दन इन लोगों की सच्चाई जान चुकी है, तो इन लोगों ने एक नई दुकान खोल रखी है। वो दुकान है अफवाह फैलाने की, अफवाह बनाओ, फिर उसे प्रवाहित करो और उसी अफवाह को सच मानकर दिनरात चिल्लाते रहो। रैली में उन्‍होंने कहा कि मेरा 7 साल का रिकॉर्ड देख लीजिए।

खोज खोज कर ऐसी पुरानी चीजों को ठीक करने में ही मेरा समय जा रहा है। अब मैं काम को ठीक कर रहा हूं, आप उनको ठीक कीजिये। उन्‍होंने कहा कि उत्तराखंड अपनी स्थापना के 20 साल पूरे कर चुका है, इन वर्षों में आपने ऐसे भी सरकार चलाने वाले देखे हैं जो कहते थे- चाहे उत्तराखंड को लूट लो, मेरी सरकार बचा लो। इन लोगों ने दोनों हाथों से उत्तराखंड को लूटा। जिन्हें उत्तराखंड से प्यार हो, वो ऐसा सोच भी नहीं सकते। उन्‍होंने कहा कि टनकपुर रेल लाइन पर भ्रम फैलाने की कोशिश हुई। हम उत्‍तराखंड में आवागमन को आसान बना रहे हैं।

विकास योजनाओं को 4 दशक तक लटकाया गया। पहले की असुविधा और अभाव को अब सुविधा और सद्भाव में बदला जा रहा है। उन्होंने आपको मूल सुविधाओं का अभाव दिया, हम हर वर्ग हर क्षेत्र तक शत प्रतिशत बुनियादी सुविधाओं को पहुंचाने के लिए दिनरात एक कर रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा कि विकास परियोजनाओं में बाधा डालने के लिए यह उन लोगों का स्थायी ट्रेडमार्क रहा है जो पहले सरकार में थे। आज शुरू हुई लखवार परियोजना का वही इतिहास है, जिसके बारे में पहली बार 1976 में सोचा गया था। आज 46 साल बाद हमारी सरकार ने इसके काम की आधारशिला रखी है।

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