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भगवान अपने भक्त के हित के लिए करते रहते हैं लीला – चन्द्रांशु महाराज

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सूरत।शहर के न्यू डिंडोली भक्तिधाम स्थित श्रीचमत्कारी हनुमान मंदिर परिसर में श्रीअवध सेवा समिति की ओर से आयोजित श्रीरामकथा के पांचवें दिन रविवार को भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

अयोध्या नगरी के राष्ट्रीय संत आचार्य चन्द्रांशु महाराज ने श्रद्धालुओं को नारद मोह प्रसंग में नारद और श्रीहरि के बीच का वार्तालाप रोचक तरीके से सुनाया। साथ ही उन्होंने मनु प्रसंग और प्रताप भानु प्रसंग की जानकारी भी दी।

उन्होंने बताया कि किस तरह से महाराज दशरथ के यहां महारानी कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा को पुत्र योग का संयोग बना। भगवान राम के जन्म के बाद अयोध्या में हर तरफ खुशियां मनाई गई। भगवान श्रीराम के जन्म पर राजा दशरथ संपूर्ण नगर में बधाइयों का वितरण कर मिठाई बंटवाते हैं। शाम को कथा समाप्त होने के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया। श्रीराम कथा प्रतिदिन दोपहर दो बजे से शाम 5.30 बजे तक चल रही है।

महाराज ने कथा में बताया कि नारद मुनि भगवान को प्रसन्न कर लेते हैं और इससे उन्हें घमंड हो जाता है। नारद भगवान शिव, ब्रह्मा और विष्णु के पास जाते हैं। इस दौरान भगवान विष्णु समझ जाते हैं कि नारद को अभिमान हो गया है। इसे दूर करने के लिए वे विश्वकर्मा को मायानगरी बनाने का आदेश देते हैं। इसमें राजा क्षीरनिधि अपनी बेटी विश्व मोहिनी का स्वयंवर रचाने के लिए नारद मुनि को बुलाते हैं। उनसे पूछते हैं कि विश्वमोहिनी को कैसा वर मिलेगा। इस दौरान नारद मुनि उन पर मोहित हो जाते हैं। इसके बाद वह भगवान विष्णु के पास जाकर हरि रूप मांगते हैं। भगवान विष्णु नारद मुनि को हरि यानि वानर रूप दे देते हैं। इसके बाद स्वयंवर में उनका उपहास हो जाता है। इससे क्रोधित होकर नारद भगवान विष्णु को श्राप दे देते हैं कि जिस तरह आज उनका वानर रूप में उपहास उड़ाया गया है एक दिन इसी रूप से भगवान विष्णु को मदद मांगनी होगी। वह स्त्री वियोग में वन में भटकेंगे। उस समय एक वानर ही उनकी मदद करेगा।

महाराज जी ने मार्मिक कथा के मुख्य बिंदु पर आते हुए कहा कि श्रीहरि विष्णु भगवान, नारद जी की बात सुनकर मुस्कुराते रहे। तभी राजकुमारी लक्ष्मी माता के रूप में समा गई। यह दृश्य देख नारद जी को समझ आया कि वह राजकुमारी कोई और नहीं स्वयं माता लक्ष्मी थीं और वह राजकुमार कोई और नहीं स्वयं श्रीहरि विष्णु थे। ज्ञान होने पर नारद मुनि भगवान से क्षमा मांगने लगे। लेकिन शाप को वापस नहीं ले सकते थे। श्रीहरि ने भी उनकी वाणी का मान रखा और श्रीराम के रूप में अवतार लिया। इसमें उन्हें माता सीता से वियोग भी सहना पड़ा और वानर रूपी रुद्रावतार हनुमानजी ने संकट के समय उनका साथ भी दिया।भगवान अपने भक्त के लिए हमेशा करते रहते है लीला।

श्री राम कथा के दौरान मुख्य मेहमान के रूप में सामाजिक अग्रणी मनोज मिश्रा,पूर्व पार्षद यजुवेंद्र दुबे,एडवोकेट रंजीत मिश्रा,फरियादी संघ ऑफ मानवाधिकार के प्रमुख प्रदीप सिंह, पूर्व शहर युवा महामंत्री पंकज तिवारी,हनुमान शुक्ला, मुन्ना तिवारी,सरोज तिवारी व हनुमान सिंह समेत अन्य कई गणमान्य विशेष रूप से उपस्थित रहे।श्रीराम कथा का संचालन बृजेश तिवारी कर रहे थे।

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