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एवरेस्ट पर मिले शवों की पहचान करना नेपाल के लिए बड़ी चुनौती, डीएनए से होगा मिलान

दुनिया के सर्वोच्च शिखर माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई करने में नाकाम रहे चार पर्वतारोहियों के शवों की पहचान कराना अब नेपाल के अधिकारियों लिए नई चुनौती बन गई। शव पहचानने की हालत में नहीं हैं, डीएनए से पहचान करने पर विचार किया जा रहा। दो सप्ताह पहले नेपाल सरकार के सफाई अभियान के दौरान ये शव मिले थे। इस सफाई अभियान में 11 टन कचरा इकट्ठा किया गया है। माना जा रहा है कि अभी और भी कई शव बर्फ के नीचे दबे हो सकते हैं। 

सरकारी अधिकारियों ने बताया कि शवों की पहचान कर उनके घरों तक पहुंचाने के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह भी पता नहीं चल पा रहा है कि ढलान पर पाए जाने से पहले ये शव कितने समय से यहां थे। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी फनिंद्रा प्रसाई ने कहा कि शव पहचान की स्थिति में बिलकुल नहीं हैं। चेहरा ठीक से पहचान में नहीं आ रहा है। वह अस्पताल से इस बारे में बात कर चुके हैं कि वह परिवारों से डीएनए सैंपल का मिलान करें।

नेपाल माउंटेनियरिंग असोसिएशन के पूर्व प्रेजिडेंट आंग तसेरिंग शेरपा का कहना है कि ये काम करना बहुत मुश्किल होता है। शवों से संबंधित अन्य जानकारी दी जानी चाहिए। जैसा कि वो कहां मिले हैं और उनके अभियान संचालक को भी इस बारे में पता होना चाहिए।

शवों को नीचे लाना खतरनाक :- 
शवों को एवरेस्ट से नीचे लाने हजारों डॉलर खर्च हो जाते हैं। वहीं इसके लिए आठ शेरपा की जरूरत पड़ती है। शवों को नीचे के दौरान बचाव दल की जान भी खतरे में पड़ जाती है। कई परिवार पसंद करते हैं कि उनके रिश्तेदार का शव पर्वत पर ही रहे, लेकिन अब ग्लोबल वार्मिंग के कारण तापमान बढ़ रहा है। इससे पहाड़ों की बर्फ पिघलती जा रही है, ऐसे में एवरेस्ट पर सालों पहले जिन लोगों की मौत हुई है, उनके शव दिखने लगे हैं। बता दें कि वर्ष 1924 में ब्रिटेन के जियॉर्ज मेलोरी लापता हो गए थे। साल 1999 में उनका शव मिला। उनके साथी एंड्रयू इरवाइन का शव आज तक नहीं मिल पाया है। 

Surat Darpan

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