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जानिए, क्या है एससीओ और भारत के लिए इसका क्या है महत्व?

एससीओ यानि शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन 2019 सम्मेलन इस बार कीर्गिस्तान के बिश्केक में 13 और 14 जून को आयोजित किया गया है। इसमें हिस्सा लेने के लिए पीएम मोदी जाएंगे और वहां पर सम्मेलन से इतर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ उनकी द्विपक्षीय मुलाकात होगी।

क्या है शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ)?

साल 1996 में रूस, चीन, ताजिकिस्तान, कजाकस्तान और किर्गिस्तान जैसे देशों ने आपसी तालमेल और सहयोग को लेकर सहमत हुए थे और तब इस शंघाई-5 के नाम से जाना जाता था। फिर चीन, रूस और चार मध्य एशियाई देशों कजाकस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उजबेकिस्तान के नेताओं ने जून 2001 में इस संगठन की शुरुआत की थी। नस्लीय और धार्मिक चरमपंथ से निबटने और व्यापार और निवेश को बढ़ाने के लिए समझौता किया।

एससीओ का उद्देश्य आतंकवाद, नशीले पदार्थों की तस्करी तथा साइबर सुरक्षा के खतरों आदि पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा करके आतंकवाद विरोधी और सैन्य अभ्यास में संयुक्त भूमिका निभाने का मंतव्य रखता है। अब यह संगठन विश्व की 40 प्रतिशत आबादी और जीडीपी के करीब 20 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करेगा।

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एससीओ में ऐसे शामिल हुआ भारत

सितंबर 2014 में भारत ने शंघाई सहयोग संगठन की सदस्यता के लिए आवेदन किया। रूस के उफ़ा में भारत को शंघाई सहयोग संगठन के सदस्य का दर्जा मिलने का ऐलान 2015 में हुआ। उफा में हुए सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ दोनों मौजूद थे। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए भारत और पाकिस्तान की सदस्यता मंजूर करने की घोषणा की थी। एससीओ के सदस्य देश हैं चीन, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, भारत और पाकिस्तान। 2017 में भारत और पाकिस्तान को एससीओ का पूर्णकालिक सदस्य का दर्जा दिया गया।

भारत के लिए एससीओ का महत्व

शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन आतंकवाद-विरोधी संगठन है, इसलिए भारत को आतंकवाद से निपटने के लिए समन्वित कार्यवाही पर जोर देने तथा क्षेत्र में सुरक्षा एवं रक्षा से जुड़े विषयों पर व्यापक रूप से अपनी बात रखने में आसानी होगी। आज आतंकवाद मानवाधिकारों का सबसे बड़ा दुश्मन है। शंघाई सहयोग संगठन के सदस्य आतंकवाद को वित्तीय सहायता देने या आतंकवादियों के प्रशिक्षण से निपटने के लिए समन्वित प्रयास करने में सफल हो सकते हैं। ऐसे में आतंकवाद, अलगाववाद और कट्टरता से संघर्ष को लेकर यह संगठन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

इस संगठन के अधिकांश देशों में तेल और प्राकृतिक गैस के प्रचुर भंडार हैं। इससे भारत को मध्य-एशिया में प्रमुख गैस एवं तेल अन्वेषण परियोजनाओं तक व्यापक पहुंच मिल सकेगी। यह संगठन पूरे क्षेत्र की समृद्धि के लिए जलवायु परिवर्तन, शिक्षा, कृषि, ऊर्जा और विकास की समस्याओं पर ध्यान केन्द्रित कर सकता है। इससे भारत को भी लाभ होगा।

क्यों अहम है SCO?
– इसे NATO को काउंटर करने वाले संगठन के तौर पर देखा जाता है
– सदस्य देशों के बीच सुरक्षा सहयोग बढ़ाता है
– आतंकवाद से निपटने खासकर IS आतंकियों से निपटने में मदद करता है
– क्षेत्र में आर्थिक सहयोग बढ़ाना

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