नई दिल्ली[Surat Darpan स्पेशल]। जैसे-जैसे बैंक अपने को हाइटेक कर रहे हैं उसी हिसाब से फ्राड करने वाले भी नित नए तरीके निकाल रहे हैं। आमतौर पर पता चलता है कि एटीएम डेबिट और क्रेडिट कार्ड यूजर के पास ही रहता है और उसके खाते से पैसे निकल जाते हैं या फिर लाखों की खरीदारी हो जाती है। आंकड़ों को देखें तो बीते 9 साल के दौरान बैंकों से होने वाले फ्राड की रकम में अब तक चार गुना का इजाफा हो चुका है। इसी के साथ बैंक से ठगी करने वाले मामलों में भी लगातार इजाफा होता जा रहा है। साल 2008-09 में बैंक से फ्राड के मामले 4372 दर्ज हुए थे वहीं अब साल 2018-19 में इनकी संख्या बढ़कर 6801 तक पहुंच गई है। यदि रकम की बात करें तो ये 1860.09 करोड़ से बढ़कर 71542.93 करोड़ रुपये पर पहुंच चुकी है। ये गंभीर मामला है। इस तरह के फ्राड से बैकिंग की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवालिया निशान लग रहे हैं। 

आंकड़ों को देखें तो बैंकों से होने वाले फ्राड में दिनोंदिन इजाफा होता जा रहा है। एक तरफ बैंक अपने सभी सिस्टम को फुलप्रुफ बताते हैं वहीं दूसरी ओर हैकर्स रोजाना फ्राड करने के नए तरीके इजाद कर ले रहे हैं। एटीएम डेबिट-क्रेडिट कार्ड इन फ्राड्स का सबसे बड़ा माध्यम बन गया है। कार्ड यूजर के पास ही रहता है और उसका खाता खाली हो जाता है। खाते से पैसे निकलने के एक साथ ही दर्जनों मैसेज यूजर के पास पहुंच जाते हैं। कुछ फ्राड करने वाले हैकर्स तो यूजर के मोबाइल नंबर में भी कुछ खेल कर देते हैं जिसकी वजह से उसके पास उसके खाते से किए गए लेन देन का तुरंत मैसेज भी नहीं मिल पाता है। वो कुछ समय रूककर उसके नंबर पर डिलिवर होता है या फिर ऐसे समय मैसेज मोबाइल में आता है जब यूजर सो रहा हो या गहरी नींद में हो।

आमतौर पर ऐसे समय पर सभी लोग अपना मोबाइल फोन या तो बंद कर देते हैं या फिर उसे साइलेंट रखते हैं। कार्डों से फ्राड करने वाले भी रात के 12 बजे से सुबह 4 बजे के बीच ही ऐसी चीजों को अंजाम देते हैं। कार्ड को क्लोन करने के लिए भी तमाम तरह के तरीके अपनाए जा रहे हैं। कहीं किसी एटीएम सेंटर में कैमरा लगाया जा रहा है तो कहीं पर कार्ड की डिटेल पढ़ने के लिए नई डिवाइस का इस्तेमाल किया जा रहा है। जहां पर अधिक लेन देन होता है वहां पर कैमरे आदि फिट किए जाने की संभावना कम रहती है तो वहां पर लगे सीसीटीवी कैमरों को ही हैक कर लिया जाता है। कैमरे हैक करके उससे डिटेल निकाल ली जाती है और फिर फ्राड होता है।

 

बैंकों को क्या करना होगा

दरअसल अभी भी कई बैंकों की प्रणाली काफी आसान है जिसके कारण फ्राड करने वालों को ऐसा करने में बहुत समस्या नहीं होती। इस वजह से अब बैंकों को इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेन-देन के लिए प्रणाली और प्रक्रिया को ग्राहकों की सुरक्षा के मद्देनजर बनाना होगा। साथ ही बैंकों को अपने ग्राहकों को एसएमएस के जरिए सूचित भी करना होगा। साथ ही बैंक उन ग्राहकों को एटीएम के अलावा कोई भी अन्य इलेक्ट्रॉनिक सुविधा नहीं देगा। जो अपना मोबाइल नंबर पंजीकृत नहीं करवाते। बैंकों को ग्राहकों को यह बताना अनिवार्य है कि किसी भी अनाधिकृत लेन-देन की जिम्मेदारी बैंक तक पहुंचाना ग्राहकों की जिम्मेदारी है। ग्राहक जितनी देर से इस बात की सूचना बैंकों तक पहुंचाएंगे, उतना ही जुर्माना उन्हें भरना पड़ेगा। 

बैंक यूजर को नहीं देना होगा कुछ भी

यदि फ्रॉड बैंक की लापरवाही से हुआ है, तो ग्राहक इसके लिए किसी भी तरह से जिम्मेदार नहीं ठहराए जा सकते। इसको इस तरह से भी समझ सकते हैं। उदाहरण के लिए यदि किसी भी वजह से बैंक के किसी ग्राहक की जानकारी लीक हो जाती है और यूजर के साथ फ्रॉड हो जाता है तो उसके लिए बैंक जिम्मेदार होगा। कई बार ये भी देखने में आता है कि बैंक कर्मचारी ही इस तरह से फ्राड में में लिप्त रहते हैं वो ही गुप्त जानकारी फ्राड करने वालों के साथ शेयर कर लेते हैं। इसका खामियाजा बैंकों को ही भुगतना होगा।

तीन दिनों में बैंक को देनी होगी सूचना

आरबीआई की गाइडलाइन्स के अनुसार, यदि फ्रॉड किसी तीसरी पार्टी की वजह से होता है, बैंक का ग्राहक इस बात की जानकारी तीन कामकाजी दिनों में बैंक को दे देता है, तो भी ग्राहक को यह नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा। इस थर्ड पार्टी में हैकर, स्कैमर और फर्जीवाड़ा करने वाले लोग शामिल हो सकते हैं।

इस तरह के फ्रॉड एटीएम के टैपिंग, वाई-फाई के साथ छेड़छाड़, एटीएम सर्वर या बैंक सर्वर में वायरस, दुकानों में पेमेंट के दौरान चुराई गई जानकारी या निजी कंप्यूटर के जरिए किए जाते हैं। बैंक के ग्राहक को भी चाहिए कि वो खुद को नुकसान और झंझट से बचाने के लिए एसएमएस और ई-मेल अलर्ट सेवा के लिए अप्लाई करें, साथ ही हर तरह के मैसेज और एलर्ट पर ध्यान रखें, यदि इसके बावजूद आपके साथ धोखा हो, तो बड़े नुकसान से बचने के लिए जल्द-से-जल्द इसकी सूचना अपने बैंक को दें।

हालांकि, आरबीआई का साफ आदेश है कि यदि ग्राहक इस बारे में सूचना देने के लिए सात दिनों से अधिक समय लेता है, तो इसमें यूजर की देयता बैंक के बोर्ड द्वारा स्वीकृत पॉलिसी के अनुसार ही तय की जाएगी। इसके बाद आरबीआई का हस्ताक्षेप खत्म हो जाता है।

कितने दोनों में वापिस आएगा पैसा

अनाधिकृत इलेक्ट्रोनिक लेन-देन के मामले में बैकों को 10 कामकाजी दिनों के भीतर ग्राहकों को पैसा लौटाना होता है। डेबिट कार्ड या बैंक खाते द्वारा किए गए फ्रॉड में बैंकों को सुनिश्चित करना होगा कि ग्राहकों को ब्याज भी मिले। क्रेडिट कार्ड से फ्रॉड होने की स्थिति में ग्राहक पर ब्याज का बोझ न पड़े।

कैसे करें शिकायत

आरबीआई द्वारा जारी दिशानिर्देशों में साफ कहा गया है कि बैंकों के लिए 24×7 शिकायत की सुविधा उपलब्ध करवाना अनिवार्य है। यह शिकायत एसएमएस, ई-मेल या आईवीआर के जरिए की जा सकती है। साथ ही कुछ बैंक ग्राहकों को बैंक के मैसेज पर रिप्लाई के जरिए भी सूचित करने की सुविधा देते हैं।

आपको क्या करना चाहिए

आरबीआई के डेटा के अनुसार, बैंकिंग फ्रॉड की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस साल मार्च अंत तक, बीते वित्त वर्ष में 3,870 मामलों में लोगों को 17,750 करोड़ रुपये की चपत लगी। ऐसे में जरूरी है कि हम हर तरह की एहतियात बरतें। सबसे पहले तो अपनी बैंक की जानकारी किसी को भी न दें, साथ ही यदि आपके साथ ऐसा कोई धोखा हो, तो इसकी सूचना सबसे पहले अपने बैंक को दें। अपने पिन, पासवर्ड और इस तरह की जानकारी को बहुत ही सुरक्षित तरीके से रखें।

ध्यान रखें की आरबीआई बैंक के ग्राहकों को कॉल, ई-मेल या मैसेज नहीं करता है।

इनाम जीतने का झांसा

इसके तहत बैंक ग्राहकों को पहले मेल पर भारी-भरकम ईनाम जीतने की सूचना दी जाती है और उसके बाद जीत की राशि ट्रांसफर करने के लिए कुछ अग्रिम राशि मांगी जाती है। इसमें नाइजीरिया समेत कुछ दूसरे देशों के गिरोहों के नाम सामने आये हैं। भारत में कुछ विदेशी नागरिक गिरफ्तार भी हुए हैं लेकिन अभी भी यह गोरखधंधा जारी है।

बुजुर्ग ग्राहक आसान निशाना

कुछ माह पहले ही दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे गैंग का भंडाफोड़ किया है जो एटीएम से पैसा निकालने वाले बुजुर्गो को अपना निशाना बनाता था। गिरोह के लोग एटीएम के पास घूमते रहते थे और जैसे ही कोई बुजुर्ग एटीएम से पैसा निकालने पहुंचता था उसकी मदद करने के नाम पर उससे सूचना हासिल कर लेते थे। इसी दौरान धोखे से वो लोग बुजुर्ग को उस बैंक का दूसरा नकली कार्ड थमा देते थे और फिर असली कार्ड से पैसा निकाल कर चंपत हो जाते थे।  

Posted By: Vinay Tiwari