राशिफल

सवाल जवाब: धन प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करने के लिए तंत्र शास्त्र द्वारा करें यह कार्य


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सप्ताह का ज्ञान
जन्म कुंडली के षष्ठ, अष्टम या द्वादश भाव में चंद्रमा की उपस्थिति व्यक्ति को अतिविचारशीलता, संवेदनशीलता, कल्पनाशीलता प्रदान करके भावुक व स्वप्नदृष्टा बनाती है। किंतु अत्यधिक संवेदनशीलता व अति भावुक होने से इनका व्यक्तित्व एकतरफा, रूखा व नाटकीय होकर इनके लाभ और सफलता पर कई बार उद्यम के अभाव में प्रभावित करता है और इनके जीवन पर नकारात्मक असर डालता है। इन्हें धन के जोखिम से बचाना चाहिए तथा सट्टे या फ्यूचर ट्रेडिंग से दूर रहना चाहिए अन्यथा लाभ की जगह हानि होगी।

टिप्स ऑफ द वीक
शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से निर्बल व छोटे जीवों की रक्षा, सेवा व भोजन का अर्पण संकट से मुक्ति, समृद्धि और प्रतिष्ठा प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है।

काला तिल, खीर, कमलगट्टे और घृत व मधु मिश्रित बिल्व पत्र, बिल्व फल तथा कमल पुष्प की आहुति धन प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करती है, ऐसा तंत्र शास्त्र के सूत्र कहते हैं।

राशि और आप (जन्म तारीख 1)
किसी भी माह की 1 तारीख को जन्मे लोगों का स्वामी ग्रह सूर्य है। ये लोग धनी, समृद्ध, अग्रणी यानी नेतृत्व से गुणों से लबरेज होने के साथ ईमानदार, दृढ़निश्चयी, रचनात्मक व स्वाभिमानी होते हैं। इन्हें सामाजिक व पारिवारिक लोगों में शुमार किया जाता है। परिवार पर इनका नियंत्रण होता है। हालांकि इनके परिवार को अक्सर इनके तप्त स्वभाव का सामना करना पड़ता है, पर ये लोग अपने परिजनों के लिए सदैव बहुत फिक्रमंद होते हैं। आरंभिक संघर्ष के बाद ये फर्श से अर्श का सफर तय करते हैं। ये लोग तर्क, तकनीकी, विज्ञान, गणित, मानसिक एवं तार्किक विषयों में गहरी समझ रखते हैं। पर, ये जल्दी हताश हो जाते हैं।

सवाल: आर्थिक कष्ट विकराल हो गया है। कोई कालसर्प योग बताता है, कोई शनि की महादशा। कोई पुखराज पहनने की सलाह देता है, तो किसी ने मंदिर में कालसर्प की तस्वीर लगवा दी है। पर सच क्या है? मैं क्या करूं? जन्म तिथि- 16.05.1964, जन्म समय- 06.00, जन्म स्थान- मुंबई।- गौतम अग्रवाल
जवाब: सद्‌गुरु कहते हैं कि आपकी राशि वृष और लग्न मीन है। षष्ठेश सूर्य जहां धन भाव में बैठ कर आपकी आर्थिक स्थिति का बाजा बजा रहा है, वहीं साथ में बृहस्पति बैठ कर आपकी समृद्धि में पलीता लगा है। मेरे नजरिए से यही दो कारण आपकी समस्या का मूल हैं। धनेश और भाग्येश मंगल लग्न में विराज कर आपको नकारात्मक उग्र और अतिसंवेदनशील बना रहा है। यह स्थिति आपको नकारात्मक चिंतन से कष्ट दे तो रही है, पर मन, वचन और काया जनित कर्मों की दिशा बदल कर इसका निराकरण हो सकता है। आपकी कुंडली में राहु और केतु के मध्य समस्त ग्रह एकत्रित हैं। लिहाजा, आप काल सर्प योग से ग्रसित तो हैं, पर यह एक ऐसा योग है, जो अपार आंतरिक क्षमता देता है और कर्मों की दिशा उलटी होने पर कष्ट भी प्रदान करता है। आत्मसंयम, धैर्य का वरण, क्षमा, विनम्रता और मीठी वाणी से बेहतर इसके निवारण का कोई दूसरा उपाय नहीं है। आप शनि की महादशा के अधीन तो हैं, पर स्वघर का शनि हानि नहीं, लाभ का कारक होता है। रही बात पुखराज और कालसर्प के चित्र की, तो मैं आपके लिए पुखराज की संस्तुति नहीं करता और मंदिर में कोई चित्र रखने मात्र से किसी योग का निवारण हो जाएगा, मेरे विचार से यह स्वयं को छलने के समान है। मस्तक नाभि और जिह्वा पर केसर मिश्रित जल का लेप, गुड़ व गेहूं का दान और नित्य सूर्य को अर्घ्य से लाभ होगा ऐसा। मैं नहीं, पारंपरिक मान्यताएं कहती हैं। सनद रहे, परिस्थितियों में बदलाव स्वयं को बदल कर ही संभव है।

सवाल: अपेक्षित सफलता से वंचित हूं। मार्गदर्शन करें। जन्म तिथि- 20.05.1976, जन्म समय- 22.10, जन्म स्थान- गाजियाबाद। – राजकुमार गगत
जवाब: सद्‌गुरु कहते हैं कि आपकी राशि कुंभ और लग्न धनु है। भाग्येश सूर्य षष्ठ भाव में विराज कर जहां आपके लिए उत्तम योग बना रहा है, वहीं साथ में बुध की उपस्थिति बुद्धादित्य योग निर्मित कर रही है। पर बृहस्पति पंचम भाव में लंगर डाल कर आपके स्वभाव में झुंझलाहट और नाटकीयता भर कर आपको अपेक्षित सफलता से वंचित कर रहा है। धनेश व पराक्रमेश शनि भी अष्टम में विराजकर धन, करियर और सफलता पर नकारात्मक असर डाल रहा है। उस पर से तुर्रा ये कि आप 13.10.2011 से शनि की 19 वर्ष की महादशा के भी अधीन हैं। पर आप चिंता न करें। मांसाहार व मदिरा का त्याग, नित्य कुछ बूंद दुग्ध मिश्रित जल से स्नान, नेत्रहीन व असहाय लोगों की मदद, मधुर वाणी, व विनम्रता का वरण लाभ का मार्ग प्रशस्त करेगा, ऐसा ज्योतिषीय अवधारणा कहती हैं।

सवाल: यदि कुंडली में बृहस्पति कमजोर या अशुभ हो, तो क्या करना चाहिए? – श्याम किशोर
जवाब: सद्‌गुरु कहते हैं कि अगर कुंडली में बृहस्पति शुभ न हो, तो सर्वप्रथम अपने आचरण और वाणी पर नियंत्रण रखना चाहिए। खीज, झुंझलाहट व मिथ्या संभाषण से दूर रहना चाहिए। सोच-समझकर बोलना चाहिए। अनैतिक आचरण, झूठी गवाही, स्वभाव की क्रूरता और किसी के अपमान से परहेज करना चाहिए। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, गुरुवार को चना, दाल, बेसन के लड्डू और केले का दान तथा मस्तक, नाभि और जिह्वा पर केसर मिश्रित जल से लेपन और खाने में केसर का प्रयोग लाभ प्रदान करता है।

नोट: अगर, आप भी सद्गुरु स्वामी आनंदजी से अपने सवालों के जवाब जानना चाहते हैं या किसी समस्या का समाधान चाहते हैं तो अपनी जन्म तिथि, जन्म समय और जन्म स्थान के साथ अपना सवाल saddgurushri@gmail.com पर मेल कर सकते हैं।

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