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IAS अफसरों के तबादले में कोई नहीं है पीछे, शिवराज सरकार ने 365 दिनों में किए थे 395 ट्रांसफर

नई दिल्लीः हाल ही में सामान्य प्रशासन विभाग से केंद्र के DoPT विभाग को भेजी गई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि प्रदेश की वर्तमान कांग्रेस सरकार की ही तरह पूर्व की शिवराज सरकार में भी अधिकारियों के ताबड़तोड़ तबादले हुए थे. साल 2018 में शिवराज सरकार ने 300 से ज्यादा तबादले किये थे. सामान्य प्रशासन विभाग की इस रिपोर्ट के बाद सियासत गर्म हो गई है. कांग्रेस को इस मामले में बीजेपी पर उंगली उठाने का मौका मिल गया है. आज तक बीजेपी कमलनाथ सरकार द्वारा किए जा रहे तबादलों को ट्रांसफर उद्योग करार दे रही थी. अब कांग्रेस मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष भूपेंद्र गुप्ता कहते हैं कि अगर हम तबादला उद्योग चला रहे हैं बीजेपी ने एक साल में ही 300 से ज्यादा तबादले करके कौन सी फुटकर दुकान खोल रखी थी?

गुप्ता कहते हैं -‘तबादले प्रशासनिक जरूरत के हिसाब से किए जाते हैं.’ कांग्रेस के इस आरोप और सामान्य प्रशासन विभाग की रिपोर्ट के बाद बीजेपी के तेवर कम नहीं हुए हैं. बीजेपी प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल कहते हैं- ‘हमने नीतिगत तबादले किए थे, कांग्रेस अनैतिक तबादले कर रही है.’ इस मसले पर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव के एस शर्मा लगातार तबादले को गलत करार देते हैं. शर्मा का तर्क है कि सरकार के लोग अपनी मनमर्जी से प्रशासन चलाने के लिए पसंदीदा अफसर बैठाते हैं.

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इससे अक्सर ही प्राथमिकताएं बदल जाती हैं. आम लोगों के काम भी इसीलिए प्रभावित होते हैं. तबादले जरूरी हैं, लेकिन राजनीतिक दलों को यह ध्यान रखना चाहिए कि लगातार तबादलों से प्रशासनिक व्यवस्था भी चरमरा सकती है. बता दें सामान्य प्रशासन विभाग से केंद्र के DoPT विभाग को भेजी गई रिपोर्ट में कांग्रेस सरकार आने के पहले शिवराज सरकार के अंतिम 365 दिनों में 395 तबादलों का जिक्र किया गया है. वहीं कमलनाथ सरकार ने आते ही एक महीने में 99 IAS अफसरों का ट्रांसफर किया था. वहीं सरकार ने 165 दिनों में कुल 400 से भी ज्यादा अधिकारियों का तबादला किया है. जिसके बाद से लगातार बीजेपी, कांग्रेस पर उंगली उठा रही है. 

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