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शिवसेना का सरकार पर तंज, ‘विजय का आनंदोत्सव खत्‍म हो गया, अलीगढ़ की दर्दनाक घटना की तरफ देखें’

मुंबई: शिवसेना के अपने मुखपत्र सामना में यूपी के अलीगढ़ में ढाई साल की बच्ची की हत्या के मामले को लेकर केंद्र की मोदी सरकार और यूपी की योगी सरकार पर तंज कसा है. सामना में लोकसभा चुनाव के मद्देनजर लिखा गया है कि विजय का आनंदोत्सव समाप्त हो गया हो तो अलीगढ़ में हुए दर्दनाक कांड की तरफ देखना चाहिए.

सामना में लिखा गया है कि उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में सिर्फ 10 हजार रुपए के लिए ढाई साल की बच्ची की निर्मम हत्या कर दी गई. पूरे देश में इसे लेकर आक्रोश की लहर है. कुछ लोगों ने परंपरानुसार निषेध की मोमबत्तियां जलाई हैं. अक्षय कुमार, अनुपम खेर, अभिषेक बच्चन और सानिया मिर्जा जैसी ‘उत्सव’ मंडली ने इस घटना के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त किया है.

शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में आगे लिखा है कि अक्षय कुमार ने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा है ‘मैं भयभीत और निराश हूं. ये वो दुनिया नहीं है, जो हम अपने बच्चों के लिए बनाना चाहते थे.’ यही पूरे देश की भावना है. सामना में लिखा है कि कांग्रेस के शासनकाल में ‘निर्भया कांड’ हुआ. उस समय जिन लोगों ने संसद नहीं चलने दी और महिला अत्याचार के विरोध में सरकार को कठोर कानून लागू करने के लिए मजबूर किया, वही लोग आज सत्ता में बैठे हैं. इसलिए वर्तमान सत्ताधारियों की जिम्मेदारी बड़ी है. लोगों के मन में इस प्रकार का असमंजस है. अलीगढ़ प्रकरण में लोग रास्ते पर उतर आए हैं.

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अलीगढ़ बार काउंसिल ने आरोपी के वकीलनामे को स्वीकार करने का विरोध किया है, यह ठीक है. अलीगढ़ में एक छोटी बच्ची की हत्या होती है. वह देश की बेटी है, यह भावना महत्वपूर्ण है. देश के प्रमुख लोगों ने इस घटना पर निषेध व्यक्त किया है. इसके कारण उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस पर दबाव बढ़ा है. ढाई साल की बच्ची गायब हो गई उस समय पुलिस ने मामला दर्ज करने में टालमटोल की और जांच भी देरी से शुरू की. उस बच्ची के माता-पिता ने आत्महत्या की धमकी दी तब पुलिस ने दौड़-भाग शुरू की और दो संदिग्धों को पकड़ा. 

सामना में कहा गया है कि पुलिस महकमे की ये लापरवाही और शिथिलता इस प्रकार के अपराधों को बल देते हैं. अलीगढ़ की इस घटना से समाज सुन्न हो गया है. यह एक प्रकार का बहरापन साबित होता है क्योंकि ऐसी कई कोमल कलियों पर अत्याचार शुरू रहता है. ‘बेटी बचाओ’ के नारे ऐसे समय व्यर्थ साबित होते हैं! अलीगढ़ की घटना से मानवता पर कलंक लगा है और समाज का सिर फिर से शर्म से झुक गया है. उस अभागी बच्ची की तड़प और चीत्कार हमारे मन को विचलित कर रही हैं.

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