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Monday, 15 August 2022
हाय रे मुंगरा का नसीब ... यहाँ जीतने वाले की नहीं बनती सूबे में सरकार

हाय रे मुंगरा का नसीब ... यहाँ जीतने वाले की नहीं बनती सूबे में सरकार

हार कर भी दिल जीता अज्जु भैया ने, जनता का गुस्सा फूट रहा राज्यसभा सांसद सीमा पर

जौनपुर | करीब 3 लाख 34 हजार 800 मतदाताओं वाली मुंगरा बादशाहपुर विधानसभा सीट पर इस बार समीकरण पिछले चुनाव के मुकाबले जुदा रहे। बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़े अजय शंकर दूबे उर्फ 'अज्‍जु भैया' 2017 की अपनी हार का बदला लेना चाहते थे, लेकिन संगठन के भितरघात और भाजपा से मुंगरा ब्लाक प्रमुख फंटू सिंह व सुजानगंज ब्लाक प्रमुख श्रीप्रकाश शुक्ला के विरोध के सामने वे धराशायी हो गए। जातीय समीकरण के दम पर सपा के पंकज पटेल ने हासिल कर ली जीत।

बताया जाता है दोनों ब्लाक प्रमुख सीमा द्विवेदी (राज्यसभा सांसद ) के काफी नजदीकी हैं। ऐसे में पूरे मुंगरा बादशाहपुर में अज्जु की हार चर्चा में बनी हुई है।
सोशल मीडिया पर कई तरह के पोस्ट देखे जा रहे हैं। एक यूजर ने लिखा है - 'अज्जु आप सबके दुलारे हो, सीमा के चलते हारे हो' तो वहीं एक सपा समर्थक ने अज्जु भैया के लिए मार्मिक पोस्ट शेयर किया है जिसमें लिखा गया है कि 'मैं सपा समर्थक हूं। आप जानते थे कि यादव वोट आपको नही मिलेंगे, फिर भी आप उनके इलाकों में वोट मांगने गए।आपकी हार से दुःख है।'

यहाँ यह बात उल्लेखनीय है कि मुंगरा के बारे में कहा जाता है कि यहाँ जिस पार्टी का विधायक बनता है, सूबे में उस पार्टी की सरकार नहीं बनती। ठीक कासगंज के उलट जहाँ जिस पार्टी का उम्मीदवार जीतता है, उसी पार्टी की सरकार प्रदेश में बनती है। 2012 के यूपी विधानसभा चुनाव में मुंगरा बादशाहपुर विधानसभा सीट से बीजेपी की सीमा द्विवेदी विधायक बनीं। इससे पहले गढ़वारा विधानसभा सीट से जीतती आ रहीं सीमा द्विवेदी ने यहाँ से लड़कर जीत की हैट्रिक तो लगाई, लेकिन यूपी में सरकार समाजवादी पार्टी की बनी।

 

2017 में यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान पूरे प्रदेश में 'मोदी की सुनामी' चल रही थी। तीन सौ से अधिक विधानसभा सीटों पर जीत के साथ यूपी में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी। तब प्रदेश भर में मोदी की सुनामी में कई ऐसे भी विधायक चुने गए जो गांव में प्रधानी का चुनाव जीतने में भी सक्षम नहीं थे। उस चुनाव में भी मुंगरा सीट पर भाजपा का कमल नहीं खिला, बल्कि बसपा का हाथी दौड़ा था। सुषमा पटेल ने बीजेपी की मौजूदा विधायक सीमा द्विवेदी को हरा दिया था। इस तरह एक बार फिर मुंगरा विधायक की सत्ता से दूरी कायम रही और लिहाजा विकास भी कोसों दूर।
मुंगरा से जीतीं बसपा विधायक सुषमा पटेल ने मुंगरा की जनता को धोखा दिया और हाथी से उतरकर साइकिल पर सवार हो गईं। चुनाव लड़ने के लिए भी उन्होंने जिले की दूसरी सीट चुन ली। वहीं तब कांग्रेस से लड़े अजय शंकर दुबे उर्फ़ अज्जु भैया बसपा व भाजपा दोनों प्रत्याशी से बड़ी मामूली अंतर से चुनाव हारे थे। जीत उनके बहुत करीब थी पर किस्मत ने साथ नहीं दिया था। इसके बावजूद वे सतत जनता के बीच रहे, उसका विश्वास जीतने का प्रयास करते रहे। 2022 के चुनाव के पहले वे भाजपा में शामिल हुए, तो भाजपा ने उनकी लोकप्रियता को देखते हुए टिकट भी दिया। लेकिन सपा के पंकज पटेल से वे 5200 वोटों से चुनाव हार गये। हालांकि पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार भाजपा का वोट प्रतिशत काफी बढ़ा। जो भाजपा पिछली बार 63 हजार पर सिमट गई थी उसे इस बार इससे 8600 अधिक वोट मिले।

 

हाय रे मुंगरा का नसीब ... यहाँ जीतने वाले की नहीं बनती सूबे में सरकार
हाय रे मुंगरा का नसीब ... यहाँ जीतने वाले की नहीं बनती सूबे में सरकार

एक नजर पुराने चुनाव पर.. 2017 के विधानसभा चुनाव में बसपा की सुषमा पटेल को 69557 वोट मिले थे। भाजपा की सीमा द्विवेदी को 63637 मत मिले थे। वह 5920 वोटों से हारी थीं। वहीं तीसरे स्‍थान पर रहे कांग्रेस प्रत्‍याशी अजय शंकर दुबे को 59288 मत प्राप्‍त हुए थे। मुंगरा बादशाहपुर सीट पर ब्राह्मण वोटरों का वर्चस्‍व है। पटेल और यादव वोटर भी मिलकर जीत का समीकरण तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 3.55 लाख मतदाताओं वाली इस सीट पर ब्राह्मण वोट करीब 80 हजार हैं जबकि पटेल 60 हजार, यादव 40 हजार व अनुसूचित जाति के वोटर करीब 65 हजार हैं। क्षत्रिय मतदाताओं की संख्या 30 हज़ार, तो वैश्‍य 26 हजार और मुस्‍लिम वोटर 20 हजार हैं।

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