टेक्नोलॉजी

खोज के समय स्टूडेंट थीं इसलिए नहीं मिल पाया था नोबेल पुरस्कार

 

जोसलीन बेल बर्नेल ने 1965 के दशक में फिजिक्स में डॉक्टरेट की पढ़ाई के लिए ब्रिटेन की कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया था। उस दिन को याद करते हुए बताती हैं मुझे लगा की दाखिला लेकर गलती कर दी है। मेरी स्थिति उस वक्त उस संस्थान में पढऩे लायक नहीं थीं। क्लास में मेरे साथ एक और लडक़ी थी। मैं इस तरह की स्थिति में कभी नहीं रही जैसी कैंब्रिज में थी।

फिर भी मैंने फैसला किया कि मैं कठिन मेहनत करूंगी। यूनिवर्सिटी के अनुरूप खुद को ढाल लूंगी। यूनिवर्सिटी पहुंचने के दो साल बाद इन्होंने ‘पल्सर्स’ नाम के वस्तु की खोज की जो 20वीं सदी की सबसे बड़ी खगोलीय खोज थी। इसका इस्तेमाल भौतिक शास्त्र (फिजिक्स) से जुड़े तथ्यों के बारे में जानकारी जुटाने में होती थी। इसके अलावा अंतरिक्ष में अत्यधिक उजाला और अंधेरा होने का कारणों के बारे में जाना जा सकता था। इस खोज के लिए इनके पीएचडी सुपरवाइजर एंटनी हेविश को 1974 में नोबेल पुरस्कार मिला था। उस वक्त ये पढ़ाई कर रहीं थी इसलिए इन्हें इस पुरस्कार से वंचित रहना पड़ा था क्योंकि किसी शोध स्टूडेंट को अवॉर्ड देने का नियम नहीं था।

फंडामेंटल फिजिक्स के क्षेत्र में सराहनीय काम के लिए 50 साल बाद इन्हें दो करोड़ रुपए का इनाम मिला है। ये राशि दिवंगत वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग को भी मिल चुकी है। ये प्राइज सिलिकॉन वैली के अलग-अलग क्षेत्रों के अमीर लोगों द्वारा चुनिंदा लोगों को दिया जाता है। बर्नेल का जन्म 1943 में आयरलैंड में हुआ था। 12 साल की उम्र में विज्ञान में रुचि हुई और आज एक सफल वैज्ञानिक हैं।

1967 में मिली थी कामयाबी
एंटनी हेविस ने एक विशेष तरह का रेडियो टेलीस्कोप तैयार किया था और बर्नेल को अंतरिक्ष में हो रही हर हलचल की रिपोर्ट तैयार करने के लिए लगाया था। दिसंबर 1967 की सर्द रात में जब ये रेडियो टेलीस्कोप से निगरानी कर रहीं थी तब इन्हें एक रोशनी दिखाई दी। तब पता चला कि सूर्य और दूसरे ग्रहों से हम 200 प्रकाश वर्ष दूर हैं। अंतरिक्ष आकाशगंगा की तरह चमकता है।

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